Aravalli Controversy: अरावली पर्वतमाला के संरक्षण से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर पर्यावरण को सर्वोपरि बताते हुए सख्त रुख अपनाया है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने साफ कहा कि विकास और खनन की दौड़ में प्रकृति की अनदेखी नहीं की जा सकती।
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Aravalli Controversy: सीमित परिभाषा से अरावली का बड़ा हिस्सा संरक्षण से बाहर हो जाएगा
मामला अरावली की नई प्रस्तावित परिभाषा से जुड़ा है, जिसमें केवल 100 मीटर या उससे अधिक ऊंची पहाड़ियों को ही अरावली क्षेत्र मानने का सुझाव दिया गया है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इस सीमित परिभाषा से अरावली का बड़ा हिस्सा संरक्षण से बाहर हो जाएगा और अवैध खनन व निर्माण को बढ़ावा मिल सकता है।
कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि वह एक हाई पावर्ड कमेटी गठित करने पर विचार कर रहा है, जो मौजूदा रिपोर्ट का स्वतंत्र और निष्पक्ष आकलन करेगी। न्यायालय का जोर इस बात पर है कि दो पहाड़ियों के बीच की दूरी या खनन की अनुमति से पहले उसके दीर्घकालिक पर्यावरणीय असर की गंभीरता से जांच हो।

