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Tuesday, February 10, 2026

लोकसभा में हंगामे के बीच ‘विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक पारित

बार-बार स्थगन के बीच लोकसभा ने पास किया ग्रामीण रोजगार से जुड़ा अहम विधेयक

नई दिल्ली: संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान गुरुवार को लोकसभा में भारी हंगामे के बीच विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक पारित कर दिया गया। इस दौरान विपक्षी दलों के लगातार विरोध प्रदर्शन के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई और अंततः भारी शोर-शराबे के बाद सदन को स्थगित करना पड़ा।

विपक्ष के विरोध के बीच पारित हुआ विधेयक

लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने सरकार पर ग्रामीण रोजगार, महंगाई और किसानों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्षी सदस्यों ने इस विधेयक पर विस्तृत चर्चा की मांग की, लेकिन सरकार ने इसे ग्रामीण भारत के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए आगे बढ़ाया।

लगातार हो रहे हंगामे के बावजूद, सरकार ने बहुमत के बल पर विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक को पारित करा लिया।

विधेयक का उद्देश्य क्या है?

सरकार के अनुसार इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना, स्थायी आजीविका सुनिश्चित करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। इसके तहत:

  • ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण

  • स्वरोजगार को बढ़ावा

  • महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक सहायता

  • ग्रामीण गरीबों के लिए रोजगार गारंटी

  • कृषि आधारित और गैर-कृषि आजीविका को समर्थन

जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं।

सरकार का पक्ष

ग्रामीण विकास मंत्री ने विधेयक पर बोलते हुए कहा कि यह मिशन विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक अहम कदम है। उन्होंने कहा कि यह योजना गांवों में पलायन को रोकने, बेरोजगारी कम करने और ग्रामीण नागरिकों की आय बढ़ाने में मदद करेगी।

मंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे राजनीतिक कारणों से ग्रामीण गरीबों के हित में लाए गए इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं।

विपक्ष ने क्या कहा?

विपक्षी दलों ने इस विधेयक को लेकर सरकार पर कई सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि:

  • पहले से चल रही योजनाओं का सही क्रियान्वयन नहीं हो रहा

  • नए मिशन के लिए पर्याप्त बजट का अभाव है

  • यह विधेयक केवल चुनावी वादों का हिस्सा है

विपक्षी सांसदों ने सदन के वेल में आकर नारेबाजी की, जिससे कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी।

सदन में भारी हंगामा और स्थगन

विरोध प्रदर्शन तेज होने के कारण लोकसभा अध्यक्ष को कई बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। हालात उस समय और बिगड़ गए जब विपक्षी सांसदों ने तख्तियां लहराईं और सरकार विरोधी नारे लगाए। अंततः भारी हंगामे के चलते सदन को दिन भर के लिए स्थगित कर दिया गया।

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राजनीतिक असर

इस विधेयक के पारित होने को सरकार ग्रामीण भारत के लिए बड़ी उपलब्धि बता रही है, जबकि विपक्ष इसे बिना चर्चा थोपे गए कानून के रूप में पेश कर रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद के बाहर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है।

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