Jharkhand News: सोमवार को जमशेदपुर एक अविस्मरणीय सांस्कृतिक क्षण का साक्षी बना, जब ओलचिकी लिपि के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंच से संथाली गीत प्रस्तुत किया। राष्ट्रपति के गीत से पूरा सभागार भावविभोर हो उठा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित मंच पर मौजूद गणमान्य अतिथियों और दर्शकों ने आंखें मूंदकर इस पल को आत्मसात किया।
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Jharkhand News: भाषा किसी समुदाय की आत्मा और स्वाभिमान की पहचान होती है
दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। राष्ट्रपति ने संथाली भाषा में “जोहार” कहकर अपना संबोधन आरंभ किया और कहा कि भाषा किसी समुदाय की आत्मा और स्वाभिमान की पहचान होती है। उन्होंने युवाओं से आधुनिक भाषाएं सीखने के साथ मातृभाषा को जीवित रखने की अपील की।
राष्ट्रपति ने ओलचिकी लिपि के संवर्धन में जुटे साहित्यकारों और संगठनों की प्रशंसा करते हुए कहा कि पंडित रघुनाथ मुर्मू की विरासत आज नई पीढ़ी आगे बढ़ा रही है। उन्होंने संथाली भाषा में प्रकाशित संविधान का उल्लेख करते हुए इसे समाज को अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने वाला कदम बताया।

