Jharkhand शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला, 3 हजार पारा शिक्षकों के मानदेय पर लगेगा असर
झारखंड, 2025: झारखंड के शिक्षा विभाग ने हाल ही में एक ऐसा कड़ा फैसला लिया है जिसने राज्य के लगभग तीन हजार पारा शिक्षकों को बड़ा झटका दिया है। राज्य परियोजना निदेशक (SPD) के हालिया आदेश के अनुसार, ‘टेट विसंगति’ के तहत आने वाले इन शिक्षकों को अब TET पास नहीं माना जाएगा। इसका सीधा असर उनके मानदेय पर पड़ेगा, और इन शिक्षकों की सैलरी में भारी कटौती की संभावना है।
Highlights:
टीईटी विसंगति और विभाग की स्पष्टीकरण
इस विवाद का मूल कारण नियुक्ति की श्रेणी और टीईटी परीक्षा के स्तर में तालमेल का न होना है। कई पारा शिक्षकों ने प्राथमिक स्तर (कक्षा 1-5) की नियुक्ति होने के बावजूद उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6-8) का TET पास किया था, जबकि कुछ शिक्षकों ने इसके विपरीत किया। इस असंगति ने विभाग को सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर किया।
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि जिस श्रेणी में बहाली हुई है, उसी का TET सर्टिफिकेट मान्य होगा। इसका मतलब यह है कि यदि किसी शिक्षक को प्राथमिक कक्षा के लिए नियुक्त किया गया है, तो केवल प्राथमिक TET पास होना ही पर्याप्त होगा।
मानदेय पर प्रभाव और सामाजिक प्रतिक्रिया
इस आदेश के बाद प्रभावित शिक्षकों को अब केवल ‘प्रशिक्षित पारा शिक्षक’ के समान मानदेय मिलेगा। इससे उनके वेतन में कटौती होने की संभावना है। शिक्षा विभाग का कहना है कि यह कदम राज्य की शिक्षा गुणवत्ता और नियुक्ति नियमों के पालन के लिए जरूरी है।
हालांकि, इस निर्णय ने शिक्षकों के बीच हड़कंप मचा दिया है। कई शिक्षक और शिक्षक संघ इस आदेश के खिलाफ कानूनी और सामाजिक बहस छेड़ चुके हैं। उनका कहना है कि कई शिक्षक वर्षों से सेवाओं में हैं और उन्होंने विभाग की अनुमति से TET परीक्षा दी थी। अब उनका वेतन घटाना अनुचित होगा।
विभाग की तर्कसंगतता और भविष्य की दिशा
विभाग का तर्क है कि TET प्रमाणपत्र का उद्देश्य केवल शिक्षक की नियुक्ति श्रेणी के अनुरूप योग्यता तय करना है। यदि शिक्षक ने गलत श्रेणी में TET पास किया है, तो उसे वास्तविक योग्यता के अनुसार ही मान्यता दी जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला राज्य की शिक्षा प्रणाली में अनुशासन और नियमों की सख्ती को दिखाता है। वहीं, इससे पहले कि सभी शिक्षक प्रभावित हों, विभाग ने उन्हें नोटिस देने और स्थिति सुधारने का अवसर भी दिया है।
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शिक्षक संघ और प्रतिक्रिया
झारखंड शिक्षक संघ ने इस फैसले पर चिंता जताई है और कहा है कि इसे शिक्षकों के हक और भविष्य के लिए पुनर्विचार किया जाना चाहिए। संघ का कहना है कि कई शिक्षक वर्षों से सरकारी सेवा में हैं और उन्हें इस तरह अचानक मानदेय कटौती का सामना नहीं करना चाहिए।
शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि TET विसंगति एक जटिल मामला है, जिसे केवल वेतन कटौती के माध्यम से हल करना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए समन्वित नीति और वैकल्पिक प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू किए जाने चाहिए।

