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Tuesday, February 10, 2026

AQI-AQI के नारों से गूंजा स्टेडियम, स्मॉग में घिरी दिल्ली में रेखा गुप्ता को करना पड़ा विरोध का सामना

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली इस समय गंभीर वायु प्रदूषण (AQI) की मार झेल रही है। इसी बीच सोमवार को अरुण जेटली स्टेडियम में आयोजित एक भव्य फुटबॉल इवेंट के दौरान उस वक्त असहज स्थिति बन गई, जब मंच पर पहुंचते ही दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को दर्शकों के विरोध का सामना करना पड़ा।

अर्जेंटीना के दिग्गज फुटबॉलर लियोनेल मेसी (Lionel Messi) के स्वागत के लिए जैसे ही सीएम रेखा गुप्ता स्टेज पर आईं, स्टेडियम में मौजूद दर्शकों के एक वर्ग ने “AQI, AQI” के नारे लगाने शुरू कर दिए। यह नारे दिल्ली में बिगड़ती हवा की गुणवत्ता को लेकर जनता के गुस्से को दर्शा रहे थे।

मुख्य बिंदु (Highlights):

  • दिल्ली में खतरनाक स्तर पर पहुंचा AQI

  • लियोनेल मेसी के स्वागत के दौरान हुआ विरोध

  • मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को स्टेडियम में झेलनी पड़ी हूटिंग

  • AAP ने बताया “अंतरराष्ट्रीय शर्मिंदगी”

  • वायु प्रदूषण बना राजनीतिक मुद्दा

दिल्ली की हवा बनी अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय

दिल्ली में लगातार खतरनाक स्तर पर बना AQI अब एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनता दिख रहा है। अर्जेंटीना के दिग्गज फुटबॉलर मेसी जैसे वैश्विक फुटबॉल आइकन की मौजूदगी के बीच प्रदूषण को लेकर विरोध प्रदर्शन ने सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्टेडियम में मौजूद कई लोगों ने मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान हूटिंग की, जिससे कार्यक्रम का माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया।

AAP का हमला: ‘इंटरनेशनल शर्मिंदगी’

इस घटना को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने सरकार पर सीधा हमला बोला। पार्टी की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो साझा करते हुए लिखा—

“International Shame, crowd for Messi shouts ‘AQI, AQI’ as soon as Delhi CM Rekha Gupta arrives.”

AAP का कहना है कि दिल्ली सरकार वायु प्रदूषण रोकने में पूरी तरह विफल रही है, और जनता का गुस्सा अब सार्वजनिक मंचों पर साफ नजर आने लगा है।

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प्रदूषण बनाम आयोजन: उठे बड़े सवाल

जहां एक ओर दिल्ली सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजनों से शहर की छवि सुधारने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर AQI संकट इन प्रयासों पर भारी पड़ता दिख रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक प्रदूषण पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक ऐसे आयोजन सरकार के लिए चुनौती बने रहेंगे।

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