Hazaribagh News: हजारीबाग चुरचू नदी, जहां कभी लगती थी नक्सलियों की जन अदालत
Hazaribagh News : कभी नक्सलवाद के खौफ से सहमा हजारीबाग (Hazaribagh) जिले का चुरचू प्रखंड (Churchu) आज शांति, सुकून और पर्यटन का नया प्रतीक बनता जा रहा है। जिस इलाके में एक समय नक्सलियों की जन अदालतें लगती थीं, जहां दिन के उजाले में भी लोग जाने से डरते थे, वही इलाका अब सैलानियों की पसंदीदा जगह बन चुका है। यह बदलाव न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था की सफलता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि शांति लौटने के बाद विकास कैसे नई रफ्तार पकड़ता है।
Highlights:
खौफ का साया और नक्सल हिंसा का दौर
चुरचू (Churchu) प्रखंड का नाम सुनते ही कभी लोगों के मन में डर बैठ जाता था। यह इलाका लंबे समय तक घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहा है। सड़कें शाम होते ही सुनसान हो जाती थीं और ग्रामीणों की जिंदगी दहशत के साये में गुजरती थी। नक्सलियों की मौजूदगी इतनी मजबूत थी कि यहां खुलेआम जन अदालतें लगाई जाती थीं। गोलियों की गूंज, सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़, और बूटों की आवाज से पूरा इलाका कांप उठता था।
चुरचू की बदली तस्वीर, लौटी शांति
समय के साथ हालात बदले। सरकार की सख्त नीति, लगातार चलाए गए नक्सल विरोधी अभियानों और बेहतर पुलिसिंग का असर दिखने लगा। चुरचू (Churchu) प्रखंड धीरे-धीरे नक्सल प्रभाव से मुक्त होता चला गया। आज हालात ऐसे हैं कि जहां कभी डर का माहौल था, वहां अब लोग बेफिक्र होकर घूमते नजर आते हैं। शांति की वापसी ने इस क्षेत्र को विकास और पर्यटन की नई दिशा दी है।
लारा नदी बनी पर्यटन की नई पहचान
चुरचू प्रखंड स्थित लारा नदी इन दिनों हजारीबाग का उभरता हुआ पर्यटन केंद्र बन गई है। सफेद चट्टानों के बीच बहती नदी, चारों ओर फैली हरियाली और जंगलों का शांत वातावरण सैलानियों को अपनी ओर खींच रहा है। खासतौर पर सर्दियों के मौसम में यहां पर्यटकों की भीड़ बढ़ जाती है। नए साल का जश्न हो या दोस्तों और परिवार के साथ पिकनिक—लोग बड़ी संख्या में लारा नदी का रुख कर रहे हैं।
शहर के पास, फिर भी लंबे समय तक अनदेखी
पर्यटकों का कहना है कि हजारीबाग शहर के बेहद नजदीक होने के बावजूद यह जगह लंबे समय तक लोगों की नजरों से दूर रही। अब सोशल मीडिया और स्थानीय प्रचार के जरिए इसकी खूबसूरती सामने आ रही है। प्रकृति की गोद में बिताया गया समय लोगों को शहर की भागदौड़ और तनाव से दूर सुकून का एहसास कराता है।
पहुंच आसान, रोजगार के नए अवसर
हजारीबाग जिला मुख्यालय से महज 12 किलोमीटर दूर स्थित लारा नदी तक पहुंचना बेहद आसान है। संत कोलंबस कॉलेज के बगल से चुरचू के रास्ते सैलानी यहां आसानी से पहुंच सकते हैं। धीरे-धीरे यह इलाका पिकनिक स्पॉट के रूप में विकसित हो रहा है, जिससे स्थानीय लोगों के लिए छोटे-बड़े रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।
पुलिस कार्रवाई से टूटा नक्सल नेटवर्क
हजारीबाग के पुलिस अधीक्षक अंजनी अंजन के अनुसार, बीते पांच दशकों में नक्सलियों के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाए गए। सघन ऑपरेशन में कई नक्सली मारे गए, कई गिरफ्तार हुए और कई मुख्यधारा में लौट आए। हाल ही में विष्णुगढ़ में तीन हार्डकोर नक्सलियों के मारे जाने की घटना भी इसी अभियान का हिस्सा है। पुलिस की सख्त कार्रवाई से क्षेत्र में अमन-चैन कायम हुआ है।
हिंसक अतीत से विकास की ओर
चुरचू का अतीत बेहद दर्दनाक रहा है। वर्ष 2001 में चुरचू जंगल में 11 सीआरपीएफ (CRPF) जवानों की शहादत, 2017 में पुलिस पर हमला और 2018 में दो ग्रामीणों की नक्सलियों द्वारा हत्या जैसी घटनाएं आज भी लोगों को झकझोर देती हैं। लेकिन आज वही चुरचू विकास और बदलाव की नई कहानी लिख रहा है।
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शांति के साथ मुस्कुराता पर्यटन
पुलिस कार्रवाई और सरकारी योजनाओं के चलते नक्सलवाद का लगभग सफाया हो चुका है। इसका सीधा लाभ पर्यटन को मिल रहा है। हजारीबाग अब झारखंड पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बना रहा है। लारा नदी और चुरचू प्रखंड इस बात का जीता-जागता प्रमाण हैं कि जब शांति लौटती है, तो विकास और प्रकृति—दोनों मुस्कुराने लगते हैं।

